सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Jawaharlal nehru biography in hindi |जवाहरलाल नेहरु का जीवन परिचय

Jawaharlal nehru biography in hindi



  जवाहरलाल नेहरु का जीवन परिचय| जवाहरलाल नेहरू की जीवनी 


1 नाम:- पंडित जवाहरलाल नेहरु

2 जन्म:- 14 नवम्बर 1893 इलाहबाद, उत्तरप्रदेश

4 पिता:- मोतीलाल नेहरु

5 माता:- स्वरूपरानी नेहरु

6 पत्नी:- कमला नेहरु

7 बच्चे:- इंदिरा गाँधी

8 म्रत्यु:- 27 मई 1964, नई दिल्ली

जवाहरलाल नेहरू का प्रारम्भिक जीवन :-

स्वतन्त्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे। इनके पिता प्रसिद्ध बैरिस्टर और स्वतंत्रता सेनानी थे। नेहरु सम्पन्न परिवार से थे। जवाहरलाल नेहरू उनके पिता की दूसरी पत्नी थी। पहली पत्नी की प्रसव के दौरान मृत्यु होगई थी। जवाहरलाल नेहरू तीन भाई-बहन थे, जिनमे से सबसे बड़े जवाहरलाल नेहरू थे और दो छोटी बहने थी। एक बहन का नाम विजया लक्ष्मी था, जो सयुंक्त राष्ट्र महासभा में सबसे पहली महिला अध्यक्ष बनी थी। छोटी बहन का नाम कृष्णा हठीसिंग था, वह एक प्रसिद्ध लेखिका थी। जवाहरलाल नेहरु कश्मीरी सारस्वत ब्राह्मण थे। इन्होने प्रारम्भिक शिक्षा हैरो स्कूल से प्राप्त की, और उच्च शिक्षा ट्रिनिटी कॉलेज ऑफ लन्दन और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से प्राप्त की।

जवाहरलाल नेहरू को ‘गुलाब का फूल’ बहुत पसंद था, जिसे वो अपने कपड़ों में हमेशा लगाकर रखते थे। उन्हें बच्चों से भी बहुत लगाव था,बच्चे जवाहरलाल नेहरू को ‘चाचा नेहरु’ कहकर सम्बोधित किया करते थे। बच्चों से लगाव के कारण ही उनका जन्म दिवस बाल दिवस के रूप मे मनाया जाता है। विश्व विख्यात पुस्तक ‘डिस्कवरी ऑफ़ इण्डिया’ जवाहरलाल नेहरू द्वारा रचित थी।

जवाहरलाल नेहरु की एक बेटी इंदिरा गाँधी थी। इंदिरा गाँधी भी कुछ वर्षों बाद मे भारत के प्रधानमंत्री हुई। इंदिरा गाँधी अपने पिता जवाहरलाल नेहरू को राजनीती गुरु मानती थी। और उन्ही से राजनीती गुण सीखे थी। इंदिरा गाँधी ने बचपन से ही अपने पिता और दादा को देख कर राजनीती सीखी थी।


जवाहरलाल नेहरु का राजनैतिक सफर :-

साल 1912 में जवाहरलाल नेहरू इंग्लैंड से वापस भारत लोट कर आये। भारत लौटने के बाद इलाहबाद हाईकोर्ट में बेरिस्टर के रूप में काम किया। 1916 में जवाहरलाल नेहरु ने कमला से सादी की।1917 में वे होम-रुल-लीग से जुड़ गये थे। 1919 में महत्मा गाँधी के संपर्क में आये जवाहरलाल नेहरू और उनके विचारों से काफी प्रभावित हुये और राजनीतिज्ञ ज्ञान इन्हें गाँधी जी के नेतृत्व में ही प्राप्त हुआ। महत्मा गाँधी से मिलने के बाद ही वह राजनीती मे आये। जब 1919 में महत्मा गाँधी ने रोलेट अधिनियम के खिलाफ़ मोर्चा सम्भाल रखा था तब जवाहरलाल नेहरु भी उससे जुड़ गये। जवाहरलाल नेहरु के साथ उनका पूरा परिवार भी गाँधी जी से काफी प्रभावित है। जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरु ने अपनी सम्पति त्याग दिया और खादी परिवेश धारण किया। 1920 और 1922 में गाँधी जी द्वारा किये गये ‘असहयोग-आन्दोलन’ में जवाहरलाल नेहरु ने सक्रीय भूमिका निभाई। इस आंदोलन मे भाग लेने के कारण जवाहरलाल नेहरू पहली बार जेल गये। 1924 में जवाहरलाल नेहरू इलाहबाद नगर-निगम के अध्यक्ष के रूप में चुने गये, अध्यक्ष के रूप दो वर्षो तक इलाहबाद शहर में काम किया। फिर दो वर्ष तक अध्यक्ष के रूप मे कार्य करने के बाद 1926 में जवाहरलाल नेहरू ने इस्तीफा दे दिया था। गाँधी जी को जवाहरलाल नेहरु में भारत का एक महान नेता नजर आ रहा था। और गाँधी जी के कहने के बाद 1926 मे जवाहरलाल नेहरू केंद्रीय राजनीती मे आगये, और 1926 से 1928 तक अखिल भारतीय कांग्रेस के महा-सचिव के रूप मे काम किया।

1928 में जवाहरलाल नेहरु की अध्यक्षता में काँग्रेस के वार्षिक-सत्र का आयोजन किया गया था। इस सत्र में कांग्रेस देश को आजदी दिलाने मे दो गुटों बट गई, पहला गुट जवाहरलाल नेहरू का था और दूसरा गुट सुभाषचन्द्र बोस का था। जवाहरलाल का गुट अंग्रेजों से  स्वतंत्रता तो चाहता था पर पूर्ण स्वतंत्रता नहीं चाहते थे। वह अंग्रेज सरकार के आधीन ही रह कर भारत मे सरकार चलाने की मांग कर रहे थे। जबकि सुभास चन्द्र का गुट सम्पूर्ण स्वतंत्रता की मांग कर रहा था। इन दो गुटों की लड़ाई में गाँधी जी ने बीच का रास्ता निकाला। गाँधी जी ने कहा कि ब्रिटेन को दो साल का समय दिया जायेगा, जिसमे वह भारत को स्वतंत्र राज्य का दर्जा दे  अन्यथा कांग्रेस एक राष्ट्रीय जन आंदोलन को जन्म देगी। परन्तु अंग्रेज सरकार ने कोई उचित जवाब नहीं दिया था। फिर जवाहरलाल नेहरु  की अध्यक्षता में दिसम्बर 1929 में लाहौर मे  काँग्रेस का वार्षिक अधिवेशन बुलाया गया। इस अधिवेशन मे  सभी सदस्य एक मत होगये और  ‘पूर्ण स्वराज’ की मांग का प्रस्ताव पारित किया गया। फिर  वह दिन आया जब पहली बार भारत का ध्वज  26 जनवरी 1930 में लाहौर मे काँग्रेस मुख्यालय में जवाहरलाल नेहरू द्वारा  फहराया गया।  1930 में गाँधी जी के द्वारा बुलाये गये  ‘सविनय अवज्ञा आन्दोलन’ मे इतना भारी जन समर्थन मिला जिससे अंग्रेज सरकार को झुकना ही पड़ा। और 
फिर जब अंग्रेज सरकार ने 1935 में भारत अधिनियम एक्ट का प्रस्ताव पारित किया, तब काँग्रेस ने चुनाव लड़ने का फैसला किया। पर जवाहरलाल नेहरु चुनाव नहीं लड़े वह बाहर रहकर ही पार्टी का समर्थन किया था। पहली बार भारत मे चुनाव हो रहे थे और  काँग्रेस ने हर राज्य में जीत दर्ज की, काँग्रेस का जितना तो तय ही था क्योंकि काँग्रेस का समर्थन महात्मा गाँधी और जवाहरलाल नेहरू कर रहे थे। जिन्हे भारत मे बहुत माना जाता था। 

 1936 में जवाहरलाल नेहरु को  काँग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया।  1942 में गांधीजी के एक और बड़े आंदोलन मे भाग लेने के कारण जेल जाना पड़ा। जिसके बाद उन्हें 1945 में छोड़ा गया। जेल से निकलने के बाद स्वतंत्रता की लड़ाई और तेज कर दी। उन्होंने बोला वह जेल जाने से नहीं डरते और वह भारत को स्वतंत्रता दिला कर रहेंगे। 

देश के प्रथम प्रधानमंत्री का चुनाव –

15 अगस्त 1947 में भारत आजादी मिलने  के बाद  काँग्रेस में प्रधानमंत्री के पद के लिए  चुनाव किये गये थे, जिसमे सरदार पटेल को  और आचार्य कृपलानी को सबसे ज्यादा वोट  प्राप्त हुए थे।  पर गाँधी जी के कहने पर जवाहरलाल नेहरू को भारत का पहला प्रधानमंत्री बनाया गया। किसी को कभी पता नहीं चला गाँधी जी ने नेहरू जी को ही क्यों चुना, काँग्रेस मे तब किसी ने विरोध भी नहीं किया था क्योंकि तब सभी महात्मा गाँधी का बहुत सम्मान करते थे। पहली बार स्वतंत्र भारत का प्रधानमंत्री बनने के बाद वह दो बार और प्रधानमंत्री के रूप मे चुने गये। वह आज तक के भारत मे सबसे जादा समय तक रहने वाले प्रधानमंत्री है। 

 

स्वतन्त्र भारत को सही तरह से गठित कर उसका सही तरह से नेतृत्व कर एक मजबूत भारत के  निर्माण  का कार्य नेहरु जी ने किया था। एक बने हुये देश को चलना आसान होता है अपेछाकृत नये स्वतंत्र हुये देश के। पर जवाहरलाल नेहरू ने नये स्वतंत्र हुये भारत को बहुत अच्छे तरीके से चलाया। 200 सालों मे अंग्रेजो ने भारत को लूट लूट कर बहुत ही गरीब बना दिया था, गरीबी ही नेहरू जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी। नेहरू जी ने आर्थिक रूप से निर्भीक बनाने के लिए भी इन्होने बहुत अहम योगदान दिया था। जवाहरलाल नेहरू शांति के बहुत बड़े पक्ष धर थे और वह किसी देश के साथ यूद्ध नहीं चाहते थे, इसलिए वह कहते थे सेना के ऊपर जादा पैसे खर्च नहीं करने चाहिए, इन्होने तो शांति प्रिय देशों का एक गुट भी बनाया था जो किसी युद्ध मे ना तो अमेरिका के साथ होंगे ना ही रूस के साथ उस गुट नाम था ‘गुट-निरपेक्ष’। पर हर देश ना भारत जैसा होता है ना ही हर नेता जवाहरलाल नेहरू जैसा होता है। 

भारत पाकिस्तान का 1947 युद्ध :-

पहले पाकिस्तान ने भारत को धोका देते हुये आजादी के तुरंत बाद कश्मीर पर हमला कर दिया और आधे कश्मीर पर अवैध कब्जा कर लिया। इसके बाद भी नेहरू युद्ध नहीं चाहते थे, भारतीय सेना पाकिस्तान को पीछे धकेल लगी और पाकिस्तान के कब्जे वाला हिस्सा भी जितने लगी तब नेहरू युद्ध और नहीं चाहते थे तो वह यूनाइटेड नेशन चले गये वह चाहते थे यह प्रॉब्लम बात चीत से हल हो पर यही जवाहरलाल नेहरू की सबसे बड़ी गलती थी, बात चीत से कोई हल तो निकला नहीं और भारत को आधा कश्मीर गवाना पड़ा। इस प्रॉब्लम को भारत आज तक झेल रहा है।


1962 का भारत-चीन युद्ध :- 


इसी तरह भारत का एक और पडोसी देश चीन जिसने भारत को धोका देते हुये लद्दाख के कुछ हिस्से पर कब्जा कर लिया और उसका नाम अक्सइ चीन रख दिया। बात तब की है जब भारत को आजाद हुये कुछ ही साल हुये थे, भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू अपने पडोसी देशों से अच्छे सम्बन्ध चाहते थे खासकर चीन से क्योंकी वह एक बड़ा देश था उसे अच्छे रिश्ते होने का मतलब था वह भारत की तरक्की मे योगदान दे सकता था। 1960 तक हुआ भी कुछ ऐसा ही तब नारे लगाए जाते थे 'हिंदी चीनी भाई भाई' नेहरू भी काफी खुश थे। लेकिन 1962 मे चीन ने भारत को धोका देते हुये अचानक भारत पर हमला कर दिया। 


चीन का हमला देख कर लग रहा था की वह बहुत पहले इस हमले की तयारी कर रहा था और भारत के प्रधानमंत्री यह सोचते रह गये चीन हमारा अच्छा दोस्त है हिंदी चीनी भाई भाई है तो चीन कभी भारत पर हमला नहीं करेगा।  इसलिए ना वह युद्ध के लिए तैयार थे ना ही भारतीय सेना। जिससे भारत को करारी हार का सामना करना पड़ा और अपने देश का एक और हिस्सा गवाना पड़ा। उस समय ना भारत के सैनिकों के पास अच्छे हथियार थे, ना सीमा मे पहुंचने के लिए रास्ते थे, भारत के सैनिकों को सीमा मे पहुंचने के लिए कई कई किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था तो भारत का हारना तो तय ही था। जिस सेना के पास कोई आधुनिक हथियार ना हो, हथियार पहुंचने के लिए रास्ते ना हो, ना मुख्य नेता युद्ध के लिए तयार हो तो हार का सामना करना ही पड़ता है। इस युद्ध के बाद भारत को सेना का महत्व समझ मे आया और भारत ने अपनी सेना को आधुनिक और ताकतवर बनाना शुरू कर दिया,  आज भारतीय सेना इतनी ताकतवर है की ना चीन ना पाकिस्तान कोई और भी  ताकतवर देश भारत से युद्ध करने के बारे मे नहीं सोच सकता है।  



जवाहरलाल नेहरु को मिला  सम्मान:- 

1955 में जवाहरलाल नेहरु को  ‘भारत-रत्न’ दिया गया। जो भारत का सर्वोच्च सम्मान है। 

जवाहरलाल नेहरु  की म्रत्यु:- 

जवाहरलाल नेहरु भारत के दोनों  पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान के साथ संबद्ध सुधारने के लिए हमेशा प्रयास करते रहे। वह सोचते थे कि हमें अपने पड़ोसी देशों से हमेशा अच्छे सम्बन्ध बनाने के प्रयास करने चाहिए।  लेकिन चीन ने भारत पर 1962 मे  हमला कर दिया, जिससे नेहरु जी बहुत आघात पंहुचा। हार के लिए भी उन्हें ही दोसी ठहराया गया।   पाकिस्तान से भी कश्मीर के मामले के बाद कभी अच्छे रिश्ते नहीं रहे। कहा जाता है इसी दुख के कारण नेहरु जी की  27 मई 1964 को दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गयी। उनकी मौत भारत देश के लिए एक बहुत बड़ी क्षती थी। 


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

jr ntr biography in hindi | जूनियर एनटीआर जीवनी

rahul sharma(micromax) biography in hindi | राहुल शर्मा जीवन परिचय| micromax story in hindi

Dilip Shanghvi biography in hindi | दिलीप संघवी की जीवनी | Dilip Shanghvi success story in hindi

Kamala Harris biography in hindi | कमला हैरिस की जीवनी | कमला हैरिस का जीवन परिचय

harshad mehta biography in hindi | हर्षद मेहता का जीवन परिचय | harshad mehta scam 1992