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jay prakash narayan biography in hindi | जयप्रकाश नारायण की जीवनी

jay prakash narayan biography in hindi




 जयप्रकाश नारायण की जीवनी 




जन्म:- 11 अक्टूबर 1902, सिताबदियारा, सारण, बिहार

पिता:-हर्सुल दयाल श्रीवास्तव

माता:- फूल रानी 

पत्नी:- प्रभावती देवी

कार्य:- स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, राजनेता

निधन:- 8 अक्टूबर, 1979, पटना, बिहार



जय प्रकाश नारायण को लोक नायक और जे पी नाम से भी सम्बोधन किआ जाता है। जय प्रकास नारायण  स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे। जय प्रकाश नारायण को इंदिरा गांधी के विरुद्ध 1970 के दसक मे विपक्ष का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है। जय प्रकाश नारायण इंदिरा गांधी की सरकार की नीतियों से नाखुश थे।

 इंदिरा गाँधी द्वारा लगाये गये आपातकाल ने उन्हें इंदिरा गाँधी के और विरुद्ध कर दिया। उन्होंने सम्पूर्ण विपक्ष को  एक साथ लाकर इंदिरा गांधी को चुनाव में हरा दिया।जय प्रकाश नारायण इतने महान थे की उनके जीवन के बारे मे सबको पढ़ना चाहिए और अपने जीवन मे उनके विचारों का अनुसरण करना चाहिए। 


जय प्रकाश नारायण की विचार धारा :-


 जय प्रकाश मार्क्सवादी (कम्युनिस्ट) हो गये थे। उनके विचार जवाहरलाल नेहरू से  बिलकुल अलग थे वह चाहते थे सरकार का जनता के जीवन मे जय्दा हस्त छेप नही  होना चाहिए। गाओं को मजबूत और आत्म निर्भर बनाना चाहिए। क्योंकी भारत की आत्म गाओं मे बस्ती है। गाँव और किसान जितने मजबूत होंगे भारत उतना ही मजबूत और समृद्ध होगा। भारत मे जाती गत भेद भाव नहीं होना चाहिए। सभी को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए, कोई ऊँचा कोई निचा नहीं होना चाहिए। सभी को पढ़ने का मौका मिलना चाहिए, और सरकारी स्कूल को बेहतरीन बनाना चाहिए। 


जय प्रकाश नारायण का प्रारंभिक जीवन:- 


 
जयप्रकाश नारायण का जन्म  बिहार के सारण जिले मे 11 अक्टूबर 1902 में हुआ था। उनकी मा का नाम फूल रानी श्रीवास्तव था और पिता का नाम हर्सुल दयाल श्रीवास्तव था। जयप्रकाश नारायण ने अपनी शुरुआती शिक्षा अपने गाँव के स्कूल से प्राप्त की। वह पढ़ने मे बहुत अच्छे थे इसलिए उनके पिता ने जब जय प्रकाश 9 साल के हुए तो उन्हें पटना के बड़े स्कूल कॉलेजिएट स्कूल मे दाखिला करवा दिया। 

 
जय प्रकाश जब 18 साल के थे,  तब उनकी शादी 1920 मे प्रभावती देवी से हुआ, वह महत्मा गाँधी की अनुयायी थी। शादी के कुछ दिनों बाद आगे की पढ़ाई के लिए वह पटना कॉलेज जाना चाहते थे। वहां पर वह प्रभावित देवी को अपने साथ नहीं रख सकते थे, इसलिए पटना जाने से पहले प्रभावती देवी को गाँधी आश्रम, साबरमती मे कस्तूरबा गांधी के पास छोड़ दिया। 

 वापस पटना आकर अपनी पढ़ाई शुरू कर दी। लेकिन कुछ दिन बाद अबुल कलाम आजाद के भाषण से प्रभावित होकर उन्होंने पटना कॉलेज को छोड़ दिया क्योंकी उस समय असहयोग आंदोलन चल रहा था,और अबुल कलाम आजाद ने भासण देते हुये कहाँ था की भारतीय लोगों को अंग्रेजो द्वारा बनाए गए सभी संस्थान का बहिष्कार कर देना चाहिए इसलिए जय प्रकाश ने अंग्रेजो द्वारा बनाए गये पटना कॉलेज को छोड़ दिया। 

और ‘बिहार विद्यापीठ’ में दाखिला ले लिया इस विद्यापीठ की नीव डॉ राजेंद्र प्रसाद ने रखा था। वहां से स्नातक डिग्री हासिल की। और फिर आगे की पढ़ाई के लिए जय प्रकाश 1922 मे अमेरिका चले गये। वहां जाकर उन्होंने बर्कले विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था। लेकिन कुछ दिनों बाद विश्वविद्यालय की फीस बढ़ गई।

 इस कारण उनका अमेरिका में रहना और पढ़ना मुश्किल होगया। फिर पढ़ने के लिए जय प्रकाश नारायण ने रेस्टोरेन्टों और दुकानों में काम किया, और अपना जीवन व्यापन किया। यहाँ काम करते हुए उन्हें श्रमिकों  की परेशानियों का ज्ञान हुआ। और वह यहाँ रह कर कार्ल मार्क्स के विचारों से बहुत प्रभावित हुये। जय प्रकाश उनके बारे मे पढ़ने लगे उनके बारे मे पढ़ते-पढ़ते वह इतने प्रभावित हुये की वह भी मार्क्सवादी बन गये।

 लेकिन वह बांकी लेफ्टविंग के नेताओं की तरह नहीं थे। लेफ्टविंग के नेता किसी भी धर्म को नहीं मानते लेकिन जय प्रकाश बोलते थे की किसी भी व्यक्ति के जीवन मे धर्म होना बहुत जरुरी होता है। 


उन्होने एम.ए. की डिग्री बर्कले विश्वविद्यालय से हासिल की। वह और आगे पढ़ना चाहते थे, इसलिए पी.एच.डी करने के लिए कॉलेज मे एडमिशन लिया। लेकिन वह पी.एच.डी की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए और भारत वापस आगये। क्योंकि उनकी माँ की तबियत बहुत खराब रहने लगी थी और उनकी माँ चाहती थी वह  उनके पास रहे।  
 

भारत वापस आने के बाद जय प्रकाश नारायण का जीवन :-


जय प्रकाश नारायण जब 1929 मे भारत वापस आये तब स्वतंत्रता संग्राम उफान पर था। वह जब अमेरिका मे थे तब भी भारत की आजादी के लिए कुछ करने का सोचते रहते थे और जब वह भारत लौटे तो उन्हें अपने देश के लिए कुछ करने का मौका मिल गया। वह स्वतंत्रता आंदोलनों मे भाग लेने लगे।

जहाँ वह महात्मा गाँधी से मिले और उनके साथ वो स्वतंत्रता संग्राम मे हिस्सा लेने लगे। 1932 मे जब कांग्रेस ने सम्पूर्ण भारत मे सविनय अवज्ञा आन्दोलन चलाया तो अंग्रेजो ने इस आंदोलन को दबाने के लिए कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। तब जय प्रकाश नारायण ने भारत के अलग-अलग भाग इस आन्दोलन को आगे बढ़ाया और अपने साथ कई युवाओं को जोड़ा। और अपनी बात जन जन तक पहुंचाई।इससे घबरा कर अंग्रेजो ने उन्हें भी     सितंबर 1932 मे मद्रास (चेन्नई ) से गिरफ्तार कर नासिक जेल भेज दिया। 

जय प्रकाश नारायण ने अलग पार्टी की नीव रखी:-


नासिक जेल में उनकी मुलाकात और भी स्वतंत्रता सेनानिओं से हुई। उनके साथ मिलकर जय प्रकाश नारायण ने कांग्रेस सोसलिस्ट पार्टी की नीव रखी।यह सभी नेता भी कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रभावित थे। इन नेताओं मे अच्युत पटवर्धन, एम. आर. मासानी, अशोक मेहता थे। जय प्रकाश इस पार्टी के महा सचिव बने, और अच्युत पटवर्धन पार्टी के अध्यक्ष बने।

1935 मे भारत मे चुनाव हो रहे थे, जय प्रकाश चाहते थे कोई भी भारतीय पार्टी इस चुनाव मे भाग ना ले लेकिन कांग्रेस ने इस चुनाव मे हिस्सा लेने का फैसला किया।  जय प्रकाश कांग्रेस के इस फैसले से ना खुश हुये और उन्होंने इसका विरोध किया।

 
इस घटना के कुछ वर्ष बाद 1939 मे द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत होगई। वह भी सुभाष चंद्र बोस की तरह इस मौके को अंग्रेजो से सम्पूर्ण आजादी पाने का सुनहरा मौका मान रहे थे। इस युद्ध मे अंग्रेजो ने भारतीय सैनिकों को युद्ध मे भेजना शुरू कर दिया और भारतीय संसाधनों का दोहन करने लगे।

जय प्रकाश नारायण ने इसका विरोध किया। जिसमे उन्हें जनता का भारी समर्थन मिल रहा था। इस दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 9 महीने की कैद की सज़ा सुनाई गई। और उन्हें हजारीबाग जेल भेज दिया गया। जहाँ से वह 1942 में अपने पांच साथियों के साथ फरार होगए।  

उन्होंने महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस के बीच के मतभेदों को दूर करने का प्रयास भी किया। क्योंकी वह नहीं चाहते थे ऐसे समय मे भारत के महान नेता अलग रहे उन्हें साथ रह कर देश को आजाद कराने के बारे मे सोचना चाहिए। आखिर इन सभी महान नेताओं के प्रयास से भारत को 15 अगस्त 1947 मे आजादी मिल गई। 


आजादी के बाद जय प्रकाश नारायण का जीवन :-


जब जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व मे स्वतंत्र भारत की पहली सरकार बन रही थी, तो नेहरू चाहते थे की जय प्रकाश भी उनकी मंत्री परिषद मे रहे लेकिन जय प्रकाश ने साफ माना कर दिया और बोला मैने कभी पद के लिए कामना नहीं की। मेरे और आपके विचारों मे बहुत अंतर है इसलिए मै आपकी सरकार मे नहीं आना चाहता। उन्होंने आजादी मिलने के बाद राजनीती छोड़ दी। 
 

आपातकाल मे जय प्रकाश का जीवन :- 


आजादी के बाद भारत मे सिर्फ एक पार्टी(कांग्रेस)थी, जिसके सामने कोई भी पार्टी नहीं थी। इसलिए लगातार उन्हें सरकार बनाने के मौके मिलते गये चाहे देश हो या फिर राज्य हो। और उन्हें पता था उन्हें कोई नहीं हटा नहीं सकता। ऐसे मे कांग्रेस सरकार मे  घोटाले होने लगे जिससे देश को बहुत नुकसान पहुंच रहा था। 

अमीर और अमीर होते जा रहे थे और आम जनता का बहुत बुरा हाल था, ना रोजगार था, ना दो वक्त का भोजन नसीब होता था, ना ही सरकार किसी की सुनती थी क्योंकी उन्हें लगता था वह ही सब कुछ है। इस देश के उनके अलवा कोई सरकार नहीं चला सकता।  

ऐसे मे बिहार के कॉलेज के युवा 1970 मे कांग्रेस सरकार के खिलाफ खड़े होगए। धीरे धीरे यह आंदोलन बहुत बड़ा होता गया।  लेकिन कोई प्रमुख नेता का उनके साथ ना होने के कारण सरकार उनकी नहीं सुन रही थी। ऐसे मे वह लोक नायक जय प्रकाश नारायण के पास पहुचे और बोला आप हमारा नेतृत्व करें।

जय प्रकाश देश की हालत को देखते हुये तैयार होगए। लेकिन उन्होंने यह बात साफ बोल दी की यह आंदोलन अहिंसक तौर पर होगा, अगर हिंसा हुई तो मै वापस आ जाऊंगा। सभी युवा उनकी बात मान गये। जय प्रकाश के आंदोलन मे आने से सभी हैरान होगए क्योंकी वह राजनीती छोड़ चुके थे। और कांग्रेस डर गई की अब कुछ बड़ा होने वाला है। 

यह आंदोलन बिहार की तात्कालिक भ्रस्टाचारी कांग्रेस सरकार को हटाने के लिए था। लेकिन जय प्रकाश के इस आंदोलन से जुड़ जाने से यह आंदोलन सम्पूर्ण भारत मे फैल गया। क्योंकी बिहार जैसे हालत पुरे देश मे थे।

जय प्रकाश ने बोला अब यह सिर्फ बिहार की सरकार को हटाने के लिए किया जाने वाला आंदोलन नहीं है ''यह एक क्रांति है'' 27 साल होगए देश को आजादी मिले हुए लेकिन देश की हालात मे कोई बदलाव नहीं आया। गरीबी और भृस्ताचार और भी ज्यादा बढ़ गया है।



 इस क्रांति से टोटल रेवोलुशन लाया जाएगा। उन्होंने कहा देश की सारी समस्याएं तभी खत्म हो सकती हैं, जब सम्पूर्ण व्यवस्था बदल दी जाए और सम्पूर्ण व्यवस्था के परिवर्तन के लिए सम्पूर्ण क्रान्ति(टोटल रेवोलुशन) बहुत जरुरी है।


इस आंदोलन मे उन्होंने बहुत प्रसिद्ध नारा दिया था। जिसने इंदिरा गाँधी जैसी कदावर नेता को भी हिला दिया था "सिंघासन खाली करो की जनता आती है " ये नारा सुनने के बाद जो आंदोलन कारी युवा थे उनके बीच आग सी दौड़ गई। सब ने अब सोच लिया की हम सब बदल कर रहेंगे। अब यह आंदोलन कॉलेज के युवाओं के साथ पुरे भारत की आम जनता का होगया। उनके साथ बहुत बड़ी संख्या मे आम लोग जुड़ते जा रहे थे। 

इस आंदोलन मे इलाहबाद हाईकोर्ट के एक फैसले ने 'आग मे घी' की तरह काम किया। इस फैसले मे इलाहबाद हाई कोर्ट ने बोला पिछले लोकसभा चुनाव मे धांधली हुई थी और इंदिरा गाँधी इसके लिए जिम्मेदार है, उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ेगा।  यह सुनकर पूरी कांग्रेस हिल गई। 

लेकिन इंदिरा पद छोड़ने को तयार नहीं थी। ऐसे मे जय प्रकाश नारायण ने अपना आंदोलन और तेज कर दिया एक नया नारा दिया "इंदिरा हटाओ"। लेकिन इंदिरा गाँधी ने अपना पद बचाने के लिए 25 जून 1975 आपातकाल लगा दीया। सभी लोग हैरान रह गये किसी को कुछ पता नहीं चल रहा था। 

सरकार सभी आंदोलनकारिओ  को पकड़-पकड़ कर जेल मे डाल रही थी। किसी की बातें नहीं सुनी जा रही थी, अब कोई भी कानून  नहीं बच्चा था। किसी को भी  पकड़ कर जेल मे डाल दिया जा रहा था। यातनाये दी जा रही थी, जबरजस्ती नसबंदी कराई जा रही थी। जय प्रकाश नारायण को भी   जेल में डाल दिया गया। 

जेल मे रहने के दौरान उनकी तबियत बहुत ज्यादा खराब होगई।  आपात काल लगे होने के बाद भी  12 नवम्बर 1976 को उन्हें छोड़ दिया गया। क्योंकि इंदिरा जानती थी अगर उन्हें जेल मे कुछ होगया तो ऐसा जनसैलाब आएगा जिसे कोई भी नहीं रोक पायेगा।


जेल से निकलने के बाद उन्हें मुंबई के जसलोक अस्पताल में जाया गया। जहाँ पता चला की उनकी किडनी ख़राब हो गयी है। जिसके बाद डॉ. ने उन्हें आराम करने और अब किसी आंदोलन मे भाग ना लेने को कहाँ। 
  
लोकतान्त्रिक देशों के दबाव मे आकार मजबूरन इंदिरा गाँधी को आपातकाल दो साल बाद जनवरी 1977 मे हटाना पड़ा और मार्च 1977 में चुनाव की घोषणा कर दी। आम जनता, सभी विपक्षी नेताों को इंदिरा गाँधी से आक्रोश था। ऐसे मे सभी विपक्षी नेता एक साथ आगये। 

 और जनता पार्टी बनाई। इस नई पार्टी दसकों पुरानी पार्टी कांग्रेस को हरा दिया। जनता तो इंदिरा गाँधी से इतनी नाराज थी की इंदिरा खुद तक नहीं जीत पाई। इस प्रकार आपात काल और जय प्रकाश नारायण  के “संपूर्ण क्रांति आदोलन” के चलते स्वतंत्र  भारत में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी।

 

लोकनायक जय प्रकाश नारायण का निधन:- 


 
जेल मे रहने के दौरान ही उनका स्वास्थ्य बिगड़ना शुरू हो गया था।   जिसके बाद पता चला था की उनकी किडनी खराब है। जिसके बाद वह  डायलिसिस पर ही रहे। और दो साल तक कस्ट झेलने बाद 8 अक्टूबर 1979 को इस महान समाज सेवी का निधन होगया।  

जय प्रकाश से जुड़े रोचक तथ्य :-


1:- भारत सरकार ने उन्हें सन 1998 में मरणोपरांत भारत रत्न से नवाजा। 

2:- 1965 में उन्हें समाज सेवा के लिए रमैन मैगसेसे पुरस्कार दिया गया। 

3:- उन्होंने दो प्रसिद्ध नारे दिये- पहला सिंघासन खाली करो की जनता आती है और दूसरा इंदिरा हटाओ। 

4:- जय प्रकाश नारायण कम्युनिष्ट विचार धारा के नेता थे। 

5:- कहाँ जाता है नेहरू ने उन्हें उपप्रधानमंत्री पद ग्रहण करने का आग्रह किया था। 

6:- वह जात-पात खत्म करना चाहते थे। 

7:- जय प्रकाश आंदोलन से बहुत सारे बड़े नेता निकले जो आज देश मे अपनी खास जगह बना कर रखी है। इन नेताओं मे लालू यादव, मुलायम यादव, नीतीश कुमार, सुशील मोदी, राम विलास पासवान और भी बहुत सारे राजनेता जेपी आंदोलन से निकले। 

8:- जय प्रकाश नारायण मार्क्सवादी नेता थे, इसलिए उनको सोवियत संघ से  इनविटेशन आया था। की वह सोवियत संघ आकर वोल्श्विक बन जाये। एक बार उन्होंने भी जाने के बारे मे सोचा, लेकिन उनके पिता ने मना कर दिया। 

9:- भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जयप्रकाश नारायण के जन्म दिवस पर एक रुपए का सिक्का 2002 मे जारी किया था।

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