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ratan tata biography in hindi | ratan tata story in hindi | रतन टाटा की जीवनी

 

ratan tata biography in hindi:-  






 रतन टाटा प्रमुख भारतीय उद्योगपतियों में से एक हैं, जो सबसे बड़े भारतीय उद्योग समूह, टाटा ग्रुप ऑफ़ कंपनीज़ के पूर्व अध्यक्ष हैं।  वर्तमान में उनके पास टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के अध्यक्ष एमेरिटस का पद है, जो टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा पावर, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इंडियन होटल्स और टाटा टेलीसर्विसेज सहित कुछ प्रमुख कंपनियों को नियंत्रित करती है।  

वह स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद परिवार के व्यवसाय में सक्रिय रूप से शामिल हो गए। उन्होंने टाटा स्टील कंपनी में एक कर्मचारी के रूप में शुरुआत की और अपने पारिवारिक व्यवसाय के बारे में जानकारी हासिल की। जेआरडी टाटा के सेवानिवृत्ति होने के बाद वह टाटा समूह के नए अध्यक्ष बने। उनके नेतृत्व में इस संगठन ने नई ऊंचाइयों को हासिल किया और बड़ी मात्रा में लाभ प्राप्त की। उन्होंने कई बड़ी देशी और विदेशी कंपनियों को टाटा समूह मे शामिल किया।  जिनमे मुख्य है - टेटली, जगुआर, लैंड रोवर और कोरस, वोल्टास  के अधिग्रहण में उनका महत्वपूर्ण योगदान था।  जिसने टाटा ग्रुप को भारत-केंद्रित कंपनी से वैश्विक ब्रांड में बदल दिया। अपनी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विस्तार के अलावा, उन्होंने भारत और विदेशों में संगठनों में निवेश भी किया है। 

 वह एक परोपकारी व्यक्ति भी हैं और टाटा ग्रुप के बिजनेस से अर्जित होने वाले आधे से अधिक धन को परोपकार के कार्यों में लगाया जाता है। अपने अग्रणी विचारों और सकारात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से, वह सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने समूह के लिए एक मार्गदर्शक बल के रूप में काम करना जारी रखा  है।


नाम: रतन टाटा 

पूरा नाम : रतन नवल टाटा 

जन्मदिन: 28 दिसंबर 1937

जन्म स्थान : सूरत 

राष्ट्रीयता: भारतीय

 आयु: 82 वर्ष, 

 राशि: मकर 

 हाइट: 5.10 फीट 

 पिता: नवल टाटा

 माँ: सूनी टाटा

भाई-बहन: नोएल टाटा

पत्नी: अविवाहित 

बच्चे: कोई नहीं 

नेट वर्थ: 1 बिलियन डॉलर 

प्रसिद्ध: भारत की प्रसिद्ध कंपनी टाटा के पूर्व सीइओ और अध्यक्ष


रतन टाटा का प्रारंभिक जीवन:-


रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 मे सूरत, भारत में हुआ था। उनके पिता का नाम नवल टाटा था और मा का नाम सुनी टाटा था, नवल टाटा, टाटा ग्रुप के संस्थापक   जमशेदजी टाटा के छोटे बेटे रतनजी टाटा के दत्तक पुत्र थे।  रतन टाटा के भाई का नाम जिमी टाटा है और एक सौतेले भाई नोएल टाटा है।


जब रतन टाटा 10 साल के थे तब उनके माता पिता अलग होगये जिसके बाद वह और उनके भाई जिमी अपनी दादी 'नवाजई टाटा'  के साथ रहे।



रतन टाटा की शिक्षा :-


रतन टाटा ने प्रारंभिक शिक्षा कैंपियन स्कूल, मुंबई से प्राप्त की और अपनी स्कूली शिक्षा कैथेड्रल और जॉन कॉनन स्कूल, मुंबई से पूरी की।

1962 में उन्होंने कॉर्नेल विश्वविद्यालय से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग मे स्नातक की डिग्री हासिल की, उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वह अमेरिका चले गये, वहां उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में दाखिला लिया और 1975 में  एडवांस मेनेजमेंट प्रोग्राम पूरा किया। 

रतन टाटा का कैरिएर :- 


1962 में, उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अपनी ही कंपनी टाटा स्टील से की, वहां उन्होंने एक मामूली कर्मचारी के तौर पर काम किया।अपनी ही कंपनी मे कर्मचारी के तौर पर काम करना एक मुश्किल काम था, लेकिन इससे उन्हें अपने परिवार के व्यवसाय और कर्मचारीयों की जरुरत, कंपनी की खामियों का पता चला। 

  
1971 में उन्होंने प्रत्यछ रूप से अपने परिवार के व्यवसाय मे कदम रखा, तब उन्हें टाटा समूह की वित्तीय मुश्किलों से जूझ रही एक कंपनी नेलको के प्रभारी के रूप में नियुक्त किया गया था।  उन्होंने इस कंपनी को बेहतर उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स डिवीजन बनाने की दिशा में कई काम किये, लेकिन देश मे चल रही आर्थिक मंदी के कारण, वह नेलको को आर्थिक मंदी बाहर नहीं निकाल पाए। जिसके कारण उनके सहयोगी ही उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया,  जिसके बाद उन्होंने नेलको का प्रभारी पद छोड़ दिया। और पिता के कहने पर 1975 मे अमेरिका जाकर एडवांस मेनेजमेंट प्रोग्राम का अध्यन किया।  

जब वह 1977 मे अमेरिका से वापस भारत आये तब उन्हें टाटा समूह की संघर्षरत कपड़ा मिल  'महारानी मिल्स' का प्रभारी नियुक्त किया गया। उन्होंने मिल के लिए एक योजना प्रस्तावित की लेकिन अन्य अधिकारियों ने इसे अस्वीकार कर दिया और मिल बंद हो गई। अब लोग उन्हें इतने बड़े टाटा समूह को सम्हालने योग्य नहीं समझ रहे थे। कई तरह के कयास लगाये जाने लगे की रतन टाटा मे वो छमता नहीं, वो बिजनेस मे दिल की सुनते है दिमाग़ की नहीं इसलिए उन्हें असफलता का सामना करना पड़ता है। 



पर उनके दादा जी टाटा ग्रुप के संस्थापक जेआरडी टाटा ने उनपर भरोसा जताया और 1981उन्हें टाटा इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष नियुक्त किया। और 1991 में जेआरडी टाटा ने टाटा समूह के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया और अपनी जगह रतन टाटा को पुरे टाटा समूह का अध्यक्ष नियुक्त किया। लेकिन अन्य शेयर धारक और अधिकारीयों ने इस फैसले पर भी आपत्ति जताई, लेकिन जब इन सभी अधिकारीयों के बीच वोट कराया गया उसमे रतन टाटा का सफलता प्राप्त हुई, ज्यादा अधिकारी रतन टाटा के पक्छ मे आये। अब उनके पास पुरे टाटा समूह का सम्पूर्ण अधिकार आगये, और आज हम सभी जानते है रतन टाटा जी के इसी ग्रुप को किस बुलंदियों पर पहुंचा दिया है। उन्होंने ना सिर्फ धन कमाया, बल्कि टाटा समूह को दुनिया के बड़े बिजनेस समूह मे से एक बना दिया है। और आज जितनी इज्जत रतन टाटा जी की जाती है, उतनी किसी और बिजनेसमैन की नहीं कीजाती होगी।  

अपने 75 वें जन्मदिन पर, यानी 28 दिसंबर 2012 को उन्होंने टाटा ग्रुप के चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया और शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप के प्रबंध निदेशक साइरस मिस्त्री ने उनका स्थान लिया।  सेवानिवृत्ति के बाद भी, वह अभी भी एक सक्रिय व्यवसायी है और आगामी होनहार व्यापारिक उपक्रमों में निवेश करता है।

रतन टाटा द्वारा किया गये प्रमुख कार्य:- 


 टाटा समूह के अध्यक्ष के रूप में, वह अपनी कंपनी के लिए अंतर्राष्ट्रीय मान्यता और प्रतिष्ठा प्राप्त करने में सक्षम थे।  कंपनी की आश्चर्यजनक वित्तीय सफलता ने टाटा समूह को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में ला दिया और उसकी देखरेख में निगम टेटली, जगुआर लैंड रोवर और कोरस सहित कई कंपनियों का अधिग्रहण करके एक वैश्विक ब्रांड बना दिया।

उन्होंने टाटा मोटर्स की पहली कार  टाटा इंडिका कार का निर्माण कर उसे सफल भी बनाया था। उसके बाद टाटा मोटर्स ने कई कारो का निर्माण किया और उन कारों ने सफलता भी पाई। उसके बाद उन्होंने टाटा नैनो को लॉन्च किया, टाटा नैनो रतन टाटा के लिए सिर्फ एक कार नहीं थी वह उनका एक ऐसा सपना था जो उन्होंने भारत आम जन के लिए देखा था। इस  कार की शुरुआत मे बहुत  डिमांड थी, यह बहुत सस्ती कार थी, लेकिन कुछ कारों के एक्सीडेंट होने के बाद इस कार का ऐसा दुरप्रचार किया गया जिससे टाटा नैनो बिलकुल बिकना बंद होगई। 



रतन टाटा एक ऐसे परोपकारी व्यक्ति हैं जिन्होंने अपने जीवन मे कई बड़े परोपकार किये है, वह  अपने हिस्से का 65% से अधिक धर्मार्थ ट्रस्टों में निवेश किया गया है। उनके जीवन का प्राथमिक लक्ष्य मानव विकास के साथ-साथ भारतीयों के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाना रहा है।

रतन टाटा व्यापार और उद्योग  के  प्रधान मंत्री परिषद के सदस्य रह चुके है।  

वह एशिया प्रशांत छेत्र के लिए RAND के केंद्र के सलाहकार बोर्ड के सदस्य भी रहे।  

वह भारत के एड्स पहल कार्यक्रम के सक्रिय भागीदार रहे हैं।

उन्होंने मित्सुबिशी कोऑपरेशन के  अमेरिकन इंटरनेशनल ग्रुप, जेपी मॉर्गन चेस और बूज़ एलन हैमिल्टन ग्रुप के अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार के रूप मे काम किया है। 


 पुरस्कार और उपलब्धियां


 2000 में, उन्हें भारत सरकार द्वारा प्रदान किए जाने वाले तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

 2004 में, उन्होंने उरुग्वे सरकार से 'ओरिएंटल रिपब्लिक ऑफ उरुग्वे का पदक' प्राप्त किया।

 2005 में, उन्हें B'nai B'rith International द्वारा 'अंतर्राष्ट्रीय विशिष्ट उपलब्धि पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।

 2007 में, उन्हें लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस की मानद फैलोशिप से सम्मानित किया गया।

 2008 में, उन्हें भारत सरकार द्वारा दिया गया दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' प्रदान किया गया।

 2009 में, उन्हें इटली सरकार की ओर से ऑर्डर ऑफ मेरिट ऑफ़ द इटैलियन रिपब्लिक का 'ग्रैंड ऑफिसर' का the अवार्ड मिला।

 2009 में, उन्हें ब्रिटिश साम्राज्य, यूनाइटेड किंगडम के मानद नाइट कमांडर ऑफ द ऑर्डर के खिताब से सम्मानित किया गया था।

 2010 में, उन्होंने बिजनेस फॉर पीस फाउंडेशन द्वारा प्रस्तुत 'ओस्लो बिजनेस फॉर पीस अवार्ड' जीता।

 2014 में, उन्हें 'द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर' का मानद नाइट ग्रांड क्रॉस प्रदान किया गया।

 व्यक्तिगत जीवन और विरासत


 रतन टाटा कुंवारे हैं। वह अपनी लो प्रोफाइल लाइफस्टाइल के लिए जाने जाते है।  वह मुंबई में एक साधारण घर में रहते है और एक टाटा सेडान में घूमते है।

((यहाँ पर हमनें रतन टाटा के जीवन के बारे में और उनके संघर्ष के बारे मे बताया है, यदि आपको उनके बारे मे और कोई जानकारी चाहिए या आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्न आ रहा है, तो कमेंट बाक्स के माध्यम से पूँछ सकते है, हम आपके द्वारा की गयी प्रतिक्रिया और सुझावों का इंतजार कर रहे है))

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