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Dilip Shanghvi biography in hindi | दिलीप संघवी की जीवनी | Dilip Shanghvi success story in hindi

Dilip Shanghvi biography in hindi




दिलीप संघवी (Dilip Shanghvi)


दिलीप संघवी प्रसिद्ध भारतीय उद्योगपति हैं, उन्होंने सन फार्मास्युटीकल्स कंपनी (Sun Pharmaceuticals) की स्थापना की, और वह खुद इस कंपनी के MD यानी मैनेजिंग डिरेक्टर (Managing Director) हैं। 

 वैसे तो भारत में कई सारी फार्मा कंपनी हैं लेकिन सन फार्मा ने अलग ही पहचान बनाई है ना सिर्फ भारत मे अपितु पूरी दुनिया मे। सन फार्मा आज भी निरंतर  क प्रगति कर रही है, निरंतर प्रगति करने वाली कम ही फार्मा  कम्पनियां भारत मे है।

दिलीप शंघवी आज भारत के अग्रणी Drug Maker (दवाई उत्पादक) माने जाते हैं। 2020 मे  इस दिग्गज उद्योग पति की कुल सम्पति 6.9 बिलियन डॉलर आंकी गयी है | इन्हें भारत के दूसरे सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार   पद्म श्री” सम्मान भी नवाजा जा  चूका है। 

आइये इन प्रतिभाशाली उद्योग पति के निजी जीवन, बिज़नस करियर, अर्जित पुरस्कार और सम्मान के बारे मे कुछ जान लेते है -

दिलीप संघवी शुरआती जीवन (Dilip Shanghvi Early Life):-


दिलीप संघवी का जन्म  1 अक्टूबर 1955 मे गुजरती जैन बनिया परिवार मे हुआ था। उनका जन्म अमरेली, गुजरात (भारत) मे हुआ था। दिलीप संघवी ने शुरुआती शिक्षा जे.जे. अजमेरा स्कूल से प्राप्त की, तथा भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज से ग्रेजुएट किया। दिलीप संघवी ने  अपना बचपन कोलकाता के  बुर्राबाजार इलाके में बिताया था। 

 वर्तमान समय में दिलीप संघवी मुंबई महाराष्ट्र (भारत) में रहते हैं। दिलीप संघवी की सादी विभा संघवी हुई इस दंपत्ति की दो संतान हैं। जिनमें एक बेटा है जिसका नाम आलोक संघवी है, और एक बेटी है जिनका नाम  विधि संघवी है। 


दिलीप संघवी का करियर और बिज़नेस (Dilip Shanghvi Career & Business):-


आज की दुनिया मे सफ़ल होने वाले हर व्यक्ति की एक खास बात  होती है, की उन्हें अपने लक्ष्य के बारे में कोई दुविधा नहीं होती है।  दिलीप संघवी (Dilip Shanghvi) भी कुछ ऐसी ही व्यक्ति है, जिन्होंने अपने सपनों को बिना किसी दुविधा के पूरा किया। उनके पास ना विज्ञानं की डिग्री थी और ना ही उनके पास कोई बड़ी पूंजी थी। 


लेकिन उन्होंने यह लक्ष्य बनाया था की एक दिन वह दवाई के कारोबार में भारत मे अपनी पहचान बना कर रहेंगे। उनके पिता एक दवाई के डीलर थे, दिलीप संघवी पढाई के साथ साथ अपने पिता के काम में हाँथ बटा दिया करते थे। तभी वह सोचते थे की एक दिन वह इस दवाई के कारोबार मे देश मे नंबर एक बनकर रहेंगे। 


इसके लिए 1983 मे वह अपने पिता से 10 हज़ार ले कर माया नगरी मुंबई आगये। और मुंबई आने के बाद दिलीप संघवी ने कुछ वक्त मनोचिकित्सा की दवाई की मार्केटिंग कि, और दवाइयों के कारोबार को बारीकी से समझा, उसके बाद वह गुजरात के वापी शहर चले गये, और वहां पर उन्होंने दवाई बनाने की एक छोटी सी फेक्ट्री शुरू की। 

इस कंपनी का नामा उन्होंने सन फार्मास्यूटिकल रखा जो आज भारत की सबसे बड़ी फार्मा कंपनी बन चुकी है, चलिए देखते कैसे दिलीप संघवी ने सन फार्मास्यूटिकल को बुलंदियों पर पहुंचाया। 


दिलीप संघवी ने जब यह छोटी  सी फैक्ट्री की शुरुआत की थी तब वह और केवल 2 लोग उनके साथ काम करते थे। और वही दो कर्मचारी उनके लिए मार्केटिंग का काम करते थे वह कंपनी की दवाई आसपास के व्यापारिओं को मुहैया कराते थे। शुरआत में सन फार्मास्यूटिकल कंपनी मे  केवल 5 तरह की दवाई उत्पादन किया जाता था।


 फिर जब उनकी कंपनी को ज्यादा ग्राहक मिलने लगे तब धीरे धीरे उन्होंने प्रोडक्ट बढ़ाना शुरू किया। इस छोटी सी कंपनी नें अपने स्थापन के चार वर्ष की छोटी सी अवधी में एक छोटे से क्षेत्र से आगे बढ़ कर पुरे देश मे अपना नाम बना लिया। अब आप भी देखते होंगे सन फार्मा के उत्पाद देश के कोने कोने में उपलब्ध है।


भारत के बाज़ार मे पहले से मौजूद बड़ी फार्मास्यूटिकल कंपनीयां जैसे रेनबक्सी, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरी और सिप्ला के होने के बाद भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई और उन सबको पीछे छोड़ा। आज सन फार्मा कंपनी के दिलीप संघवी के नाम का डंका बजता है।


उन्होंने अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए बांकी के लोगों से हट कर अलग ही रास्ता बनाया उन्होंने आम दवाइयों के बजाय “लंबी और असाध्य बीमारीयों की दवाइयों के उत्पादन करने मे अपना ध्यान केंद्रित किया। दूसरी कम्पनियां किस रणनिति से काम कर रही है इसकी चिंता को छोड़ कर वह सिर्फ अपने लक्ष्य को हासिल करने मे लगे रहे है। 

1983 मे 10,000 रूपये से शुरू की गयी सन फार्मा कंपनी आज दुनिया मे फार्मा सेक्टर की लीडर बनी हुई है। इस सफलता का श्रेय दिलीप संघवी और उनकी मेहनत को जाता है।

वर्तमान समय में सन फार्मा का मार्केट केप 2.20 लाख करोड़ पर पहुंच चूका है। सन फार्मा की निकटतम प्रतिद्वंद्वी कंपनी डॉ. रेड्डीज का मार्केट केप सन फार्मा  से करीब तीन गुना कम है। 


दिलीप संघवी द्वारा खरीदी गई अन्य कंपनी :-


 दिलीप संघवी ने 1987 में घाटे में चल रही अमेरिका की “कैरको फार्मा” कंपनी को 5 करोड़ डॉलर मे ख़रीदा, यह उनके द्वारा किया गया पहला बड़ा इन्वेस्टमेंट था। 

उसके बाद दिलीप संघवी नें अमेरिका की ही अन्य दो कंपनी को खरीद लिया जिनके नाम “एबल फार्मा” और “वैलीएंट फार्मा” है।  

फिर दिलीप संघवी ने इजराइल की “टैरो फार्म” कंपनी 45 करोड़ डॉलर में खरीदी लिया। आज टैरो फार्मा दिलीप संघवी के लिए सबसे लाभ दायक इन्वेस्टमेंट साबित हुई है, आज की तारीख में सन फार्मा की 50% आमदनी इसी कंपनी से आती है। 

दिलीप संघवी घाटे में चल रही किसी भी फार्मा कंपनी को खरीद लेते है और अपनी मेहनत से उसकी कायापलट कर उसे भी बुलब्दियों मे पंहुचा देते है। इसलिए उन्हें फार्मा किंग की उपाधी दी जाती है। 


दिलीप संघवी को प्राप्त पुरस्कार और सम्मान (Dilip Shanghvi  Awards & Achievements)-

 

1- 2011 में दिलीप संघवी को   CNN-IBN Indian of the Year in Business का अवार्ड मिला। 

2- 2015 मे कुछ वक्त के लिए  दिलीप संघवी ने भारत के सबसे धनी व्यक्ति मुकेश अम्बानी को पीछे छोड़कर भारत के सबसे अमीर व्यक्ति बनने का सम्मान प्राप्त हुआ। 

3- 2015 से पहले लगातार 8 साल तक फोबर्स बिज़नस मेगेजीन की लिस्ट में अव्वल नंबर पर रहने वाले मुकेश अंबानी को पछाड़ कर भारत के सबसे धनी व्यक्ति बने थे।  

4- 2016 में दिलीप संघवी को भारत सरकार की ओर से  “पद्म श्री” पुरस्कार दिया गया था। 


((यहाँ पर हमनें दिलीप संघवी  के जीवन के बारे में और उनके संघर्ष के बारे मे बताया है, यदि आपको उनके बारे मे और कोई जानकारी चाहिए या आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्न आ रहा है, तो कमेंट बाक्स के माध्यम से पूँछ सकते है, हम आपके द्वारा की गयी प्रतिक्रिया और सुझावों का इंतजार कर रहे है)) 


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